सारांश: सावन (श्रावण मास) 2026 उत्तर भारत में गुरुवार, 30 जुलाई से और दक्षिण-पश्चिम भारत में गुरुवार, 13 अगस्त से शुरू हो रहा है। दोनों पंचांगों में चार-चार सावन सोमवार हैं। मूल साधना सरल है — प्रतिदिन "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जप, स्वास्थ्य के लिए महामृत्युंजय मंत्र, और सोमवार का हल्का फलाहार व्रत। इस गाइड में तिथियां, अर्थ सहित मंत्र, व्रत विधि और चार सोमवार का जप संकल्प दिया गया है।
सावन 2026 की तिथियां — संक्षिप्त उत्तर
उत्तर भारत (पूर्णिमांत): 30 जुलाई से अगस्त के अंत तक। सोमवार: 3, 10, 17, 24 अगस्त।
दक्षिण-पश्चिम भारत (अमांत): 13 अगस्त से सितंबर के आरंभ तक। सोमवार: 17, 24, 31 अगस्त, 7 सितंबर।
पूरे सावन प्रतिदिन ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें — रुद्राक्ष माला या डिजिटल काउंटर पर, उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके, स्नान के बाद प्रातःकाल।
सावन 2026 कब से है?
श्रावण हिंदू चंद्र वर्ष का पांचवां महीना है, और भारत में दो पंचांग-पद्धतियां प्रचलित होने के कारण इसकी शुरुआत अलग-अलग तिथियों पर होती है। 2026 में:
| क्षेत्र | पंचांग | सावन आरंभ | सोमवार |
|---|---|---|---|
| उत्तर भारत (यूपी, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, एमपी, बिहार, हिमाचल, उत्तराखंड) | पूर्णिमांत | गुरु, 30 जुलाई 2026 | 3, 10, 17, 24 अगस्त |
| दक्षिण-पश्चिम भारत (महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना) | अमांत | गुरु, 13 अगस्त 2026 | 17, 24, 31 अगस्त, 7 सितंबर |
दोनों पद्धतियों में महीना लगभग 30 दिन चलता है। आरंभ और समापन की सटीक तिथि अपने स्थानीय पंचांग से अवश्य मिलाएं — तिथि के आरंभ-समय के अनुसार कहीं-कहीं एक दिन का अंतर आ सकता है।
सावन शिव को क्यों प्रिय है?
परंपरा समुद्र मंथन की कथा से जुड़ी है। जब मंथन से हलाहल विष निकला और सृष्टि पर संकट आया, तब शिव जी ने उसे पीकर कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। पुराणों के अनुसार यह श्रावण मास में हुआ। विष की उष्णता शांत करने के लिए भक्त पूरे सावन शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करते हैं — यही जलाभिषेक की परंपरा है, और यहीं से कांवड़ यात्रा का भी उद्गम है, जिसमें श्रद्धालु पैदल गंगाजल लेकर शिव मंदिरों तक जाते हैं।
सोमवार वर्ष भर शिव जी का दिन है — सोम अर्थात चंद्रमा, जिसे शिव मस्तक पर धारण करते हैं। सावन के भीतर पड़ने वाला सोमवार इसलिए दोहरा फल देता है, और यही कारण है कि सावन के चार सोमवार वर्ष के सबसे अधिक व्रत-जप वाले दिन हैं। बहुत से साधक सोलह सोमवार व्रत का आरंभ भी सावन से ही करते हैं, और विवाहित महिलाएं सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखती हैं।
सावन में कौन से मंत्र जपें
ॐ नमः शिवाय
Om Namaḥ Śivāya
अर्थ: "शिव को नमन।" पंचाक्षरी मंत्र — समस्त शिव साधना का हृदय। बिना दीक्षा के सबके लिए सुरक्षित। सावन की मानक साधना: प्रतिदिन 108 बार।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
Om Tryambakaṃ Yajāmahe...
अर्थ: ऋग्वेद (7.59.12) का महामृत्युंजय मंत्र — "हम त्रिनेत्रधारी की उपासना करते हैं... वे हमें मृत्यु-बंधन से मुक्त करें।" स्वास्थ्य, रोग-मुक्ति, रक्षा और भय-निवारण के लिए। 108 बार, शुद्ध उच्चारण के साथ — पहले धीमी गति से सीखें।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ।
Om Tatpuruṣāya Vidmahe...
अर्थ: रुद्र गायत्री — महादेव रूप में शिव का ध्यान-आवाहन। पंचाक्षरी जप के बाद गहरी साधना चाहने वाले 11, 27 या 108 बार जपते हैं।
यदि इस सावन एक ही मंत्र जपना है तो ॐ नमः शिवाय चुनें। स्वास्थ्य की चिंता हो — अपनी या परिवार में किसी की — तो महामृत्युंजय जोड़ें। कुंडली में कोई ग्रह दोष हो तो उसका बीज मंत्र साथ चल सकता है — देखें नवग्रह बीज मंत्र गाइड।
सावन सोमवार व्रत और जप विधि
- प्रातः स्नान — संभव हो तो सूर्योदय से पहले। स्वच्छ, हल्के रंग के वस्त्र — शिव के लिए श्वेत या भगवा पारंपरिक हैं।
- संकल्प लें। "आज सावन सोमवार को मैं शिव जी को जल अर्पित करूंगा/करूंगी और ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करूंगा/करूंगी — [अपना उद्देश्य]।"
- जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर जल (या जल-दूध) अर्पित करें — मंदिर में या घर के छोटे शिवलिंग पर। बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं। शिवलिंग पर तुलसी और केतकी न चढ़ाएं।
- उत्तर या पूर्व मुख करके जप करें। दाहिने हाथ में रुद्राक्ष माला, या यात्रा-कार्य के समय डिजिटल जप काउंटर। ॐ नमः शिवाय 108 बार, बिना जल्दबाजी — लगभग 10–12 मिनट।
- महामृत्युंजय जोड़ें (108 बार, समय कम हो तो 11 बार) यदि स्वास्थ्य-रक्षा उद्देश्य है।
- व्रत हल्का रखें। फलाहार — फल, दूध, संध्या आरती के बाद एक सात्विक भोजन। निर्जला आवश्यक नहीं।
- संध्या को दीपक जलाएं, आरती करें, और हो सके तो एक छोटा जप-सत्र और। अंत में एक मिनट का मौन।
चार सोमवार का जप संकल्प
पहली बार गंभीर जप-साधना शुरू करने के लिए सावन स्वाभाविक अवसर देता है: चार सोमवार, चार लक्ष्य।
| सोमवार | उस सप्ताह की दैनिक साधना | सोमवार को अतिरिक्त |
|---|---|---|
| पहला | ॐ नमः शिवाय — 1 माला (108) | व्रत + जलाभिषेक |
| दूसरा | 1 माला + महामृत्युंजय 11 बार | व्रत + मंदिर दर्शन |
| तीसरा | 2 माला (216) | व्रत + महामृत्युंजय 108 बार |
| चौथा | 2 माला, अखंड क्रम | व्रत + रुद्र गायत्री 27 बार से समापन |
लक्ष्य संख्या नहीं, एक पवित्र महीने में अटूट दैनिक क्रम है। पंचांग, परिवार का वातावरण और मंदिर — सावन में सब कुछ साधना के पक्ष में होता है, इसलिए आरंभ के लिए इससे सरल महीना नहीं मिलेगा।
उत्तर और दक्षिण भारत में तिथियां अलग क्यों?
उत्तर भारत पूर्णिमांत पद्धति मानता है — चंद्र मास पूर्णिमा को समाप्त। दक्षिण-पश्चिम भारत अमांत — मास अमावस्या को समाप्त। दोनों में महीने की सीमाएं लगभग 15 दिन आगे-पीछे रहती हैं, इसीलिए 2026 में सावन दिल्ली में 30 जुलाई से और मुंबई-बेंगलुरु में 13 अगस्त से है।
व्यावहारिक बात: आपके सोमवार व्रत की तिथियां आपकी पारिवारिक परंपरा से तय होती हैं, वर्तमान निवास से नहीं — पुणे में रहने वाला यूपी का परिवार सामान्यतः पूर्णिमांत तिथियां ही मानता है। और महीने के भीतर की तिथि-आधारित त्योहार (नाग पंचमी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी) पूरे देश में एक ही दिन पड़ते हैं। संदेह हो तो अपने परिवार का पंचांग देखें।
सामान्य गलतियां
- शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाना। तुलसी विष्णु-कृष्ण के लिए है; शिव को बेलपत्र, श्वेत पुष्प और जल-दूध अर्पित करें।
- महामृत्युंजय का जल्दबाजी में अशुद्ध जप। यह वैदिक मंत्र है — उच्चारण का महत्व है। पहले सुनकर धीमी गति से सीखें; संख्या से पहले शुद्धता।
- उत्साह में निर्जला व्रत। फलाहार पूर्ण मान्य है। स्वास्थ्य पहले।
- उंगलियों पर गिनकर क्रम खोना। रुद्राक्ष माला या जप काउंटर रखें — माला के बीच गिनती भूलना ही शुरुआती साधकों के छोड़ने का सबसे बड़ा कारण है।
- बड़ी शुरुआत, टूटा क्रम। पहले सोमवार 11 माला और फिर कुछ नहीं — इससे अच्छा है पूरे 30 दिन रोज़ एक सच्ची माला।
- अपनी पंचांग-परंपरा की अनदेखी। व्रत की तिथियां तय करने से पहले जान लें कि परिवार पूर्णिमांत मानता है या अमांत।
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सावन 2026 कब से शुरू है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग — यूपी, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, एमपी, बिहार) में सावन 2026 गुरुवार, 30 जुलाई से शुरू होगा। दक्षिण और पश्चिम भारत (अमांत पंचांग — महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु) में गुरुवार, 13 अगस्त से। दोनों ही लगभग 30 दिन चलते हैं। सटीक तिथि अपने स्थानीय पंचांग से अवश्य मिला लें।
सावन 2026 में कितने सोमवार हैं?
दोनों पंचांगों में चार-चार सोमवार हैं। उत्तर भारत (पूर्णिमांत): 3, 10, 17 और 24 अगस्त 2026। दक्षिण-पश्चिम भारत (अमांत): 17, 24, 31 अगस्त और 7 सितंबर 2026। सोमवार शिव जी का दिन है, इसलिए सावन के सोमवार व्रत और जप के लिए वर्ष के सबसे फलदायी दिन माने जाते हैं।
सावन में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
सावन का मुख्य मंत्र पंचाक्षरी "ॐ नमः शिवाय" है — प्रतिदिन 108 बार, या कम से कम हर सोमवार। स्वास्थ्य, रोग से रक्षा या भय-निवारण के लिए महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...) 108 बार जोड़ें। शुरुआत करने वाले केवल ॐ नमः शिवाय से आरंभ करें — यह बिना दीक्षा के सबके लिए सुरक्षित माना जाता है।
क्या बिना पूर्ण उपवास के सावन सोमवार व्रत रख सकते हैं?
हां। सबसे प्रचलित रूप फलाहार है — फल, दूध और संध्या पूजा के बाद एक सात्विक भोजन। निर्जला व्रत आवश्यक नहीं है, और किसी भी स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाओं और परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों के लिए उचित भी नहीं। व्रत की कठोरता से अधिक महत्व संकल्प और जप का है।
शिव मंत्र जप के लिए कौन सी माला श्रेष्ठ है?
शिव मंत्रों के लिए रुद्राक्ष माला शास्त्रीय और सर्वोत्तम विकल्प है — रुद्राक्ष स्वयं शिव को प्रिय है। ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय दोनों के लिए 108 दानों की रुद्राक्ष माला प्रयोग करें। शिव जप में तुलसी माला का प्रयोग न करें — तुलसी विष्णु-कृष्ण जप के लिए आरक्षित है। माला उपलब्ध न हो तो डिजिटल जप काउंटर मान्य विकल्प है।
क्या महिलाएं मासिक धर्म में शिव मंत्र जप सकती हैं?
अधिकांश परंपराओं में मासिक धर्म के दौरान मानसिक जप वर्जित नहीं है। जहां परिवार नियम मानते हैं, वे शिवलिंग स्पर्श और औपचारिक पूजा पर लागू होते हैं — नाम-स्मरण पर नहीं। मंत्र सुनने का भी पूर्ण लाभ है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार चलें।
पूर्णिमांत और अमांत पंचांग में क्या अंतर है?
पूर्णिमांत पंचांग में चंद्र मास पूर्णिमा को समाप्त होता है (उत्तर भारत की परंपरा), जबकि अमांत में अमावस्या को (दक्षिण-पश्चिम भारत की परंपरा)। इसी कारण महीने की सीमाएं लगभग 15 दिन आगे-पीछे रहती हैं और सावन दिल्ली में 30 जुलाई से, पर मुंबई-बेंगलुरु में 13 अगस्त से शुरू होता है। महीने के भीतर की तिथि-आधारित त्योहार (रक्षाबंधन, जन्माष्टमी) पूरे देश में एक ही दिन पड़ते हैं।



